Tapri सिर्फ दुकान नहीं थी...
गाँव की सड़क के किनारे लकड़ी की छोटी-सी दुकान।
ऊपर टीन की छत, एक पीली बल्ब की रोशनी,
काँच के डिब्बों में सुपारी और सौंफ, सामने चाय की केतली
और पास खड़ी पुरानी साइकिलें।
कोई खेत से लौटकर आता था, कोई स्कूल से,
कोई बस यूँ ही दोस्तों के साथ।
यहाँ पान बिकता था... लेकिन यादें मुफ्त मिलती थीं।